मेरे दिल के कच्चे आंगन से
तेरे नाम की मिट्टी बोल रही है
चाहता हूँ उस मिट्टी से
मूरत तेरी एक गढ़ डालूं
पर तेरे इश्क की
कमी खल रही है
पता नहीं क्यूँ
जब सामने तुम होती हो
ख़ामोशी की पेड़ से
हर्फ़ कुछ बंध से जाते हैं
होंठ थरथराते हैं
मैं दिये जला शब्दों को
ढूंढता रह जाता हूँ
सीढियों से उतारते
जब तुम्हें देखा था
नहीं जानता
वह रात थी
या दिन था
मगर मेरे पास ठहरे सागर में
एक तूफ़ान था
खुदा को भी क्या सूझी
तूफ़ान की पोटली बना
मेरे हाथों पे रख दी
अगली सुबह
सूरज कुछ घबराया सा
दस्तक देता मेरे दरवाजे पर
कहा उसने
मेरी सातवीं किरण
आत्मिक कणों से भरी हुई
है कहीं खोई हुई
मैंने कहा
तेरी किरण है यहीं
मेरे उसके दरम्यान कहीं
मैंने तो पहचान लिया
उसे भी तो जानने दे
रात की ऑंखें फिर जब खुलीं
चाँद ने चरखे पर बैठ
बादलों की रुई काती
उस धागे से मैं
सातवीं किरण में खिले
लाल सुर्ख फूलों की
एक माला बनाऊंगा
उस कच्ची मिट्टी की मूर्ति गढ़
मैं उसे पहनाऊंगा
ख़ामोशी के पेड़ से
अक्षर शायद मैं ना तोड़ पाऊं
पर झड़े कुछ हर्फों को
मैं उस तक पहुंचाऊंगा
माना की वो रात होगी बड़ी लम्बी
पर किरणों के काफिले
चल पड़े हैं
उस सातवीं किरण को खोजने।
तेरे नाम की मिट्टी बोल रही है
चाहता हूँ उस मिट्टी से
मूरत तेरी एक गढ़ डालूं
पर तेरे इश्क की
कमी खल रही है
पता नहीं क्यूँ
जब सामने तुम होती हो
ख़ामोशी की पेड़ से
हर्फ़ कुछ बंध से जाते हैं
होंठ थरथराते हैं
मैं दिये जला शब्दों को
ढूंढता रह जाता हूँ
सीढियों से उतारते
जब तुम्हें देखा था
नहीं जानता
वह रात थी
या दिन था
मगर मेरे पास ठहरे सागर में
एक तूफ़ान था
खुदा को भी क्या सूझी
तूफ़ान की पोटली बना
मेरे हाथों पे रख दी
अगली सुबह
सूरज कुछ घबराया सा
दस्तक देता मेरे दरवाजे पर
कहा उसने
मेरी सातवीं किरण
आत्मिक कणों से भरी हुई
है कहीं खोई हुई
मैंने कहा
तेरी किरण है यहीं
मेरे उसके दरम्यान कहीं
मैंने तो पहचान लिया
उसे भी तो जानने दे
रात की ऑंखें फिर जब खुलीं
चाँद ने चरखे पर बैठ
बादलों की रुई काती
उस धागे से मैं
सातवीं किरण में खिले
लाल सुर्ख फूलों की
एक माला बनाऊंगा
उस कच्ची मिट्टी की मूर्ति गढ़
मैं उसे पहनाऊंगा
ख़ामोशी के पेड़ से
अक्षर शायद मैं ना तोड़ पाऊं
पर झड़े कुछ हर्फों को
मैं उस तक पहुंचाऊंगा
माना की वो रात होगी बड़ी लम्बी
पर किरणों के काफिले
चल पड़े हैं
उस सातवीं किरण को खोजने।
1 comment:
Your Creativity is Contagious.
Post a Comment