चुपके से एक दिया कोई जला गया
हवा का रूख मोड़ कर मुझे जगा गया।
अधकचरे ख्वाबों की तामिल ना हुई
कानों में कुछ फुसफुसाकर चला गया।
आखें खुली तो देखा टिमटिमाती रौशनी
सपनों के सूर्य को बादलों में कोई छुपा गया।
उनकी आमद के चर्चे और अपना जागना
जैसे बिना कद्रदानों के मुशायरा कोई सजा गया।
हवा का रूख मोड़ कर मुझे जगा गया।
अधकचरे ख्वाबों की तामिल ना हुई
कानों में कुछ फुसफुसाकर चला गया।
आखें खुली तो देखा टिमटिमाती रौशनी
सपनों के सूर्य को बादलों में कोई छुपा गया।
उनकी आमद के चर्चे और अपना जागना
जैसे बिना कद्रदानों के मुशायरा कोई सजा गया।
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