वह प्रबुद्ध है
आँखों पर
सुनहरी फ्रेम का चश्मा
चेहरे पर
रहस्यमयी दिव्य मुस्कान
मूछें कटी
करीने से
चाल में
त्रिलोकी अभिमान
पढता सुबह सवेरे
अंग्रेजी का अखबार
दि हिन्दू, दि एक्सप्रेस
पन्ने पलटते
गहन चिंतन में मग्न
हो रहा जैसे
बुद्धि और तर्क का लग्न
आज रात के भोज में
सूट कौन सा पहनना है ?
फ्रेंच शराब के कितने प्याले
मुर्गे के साथ उड़ेलना है?
सामने कांच की
चकमक मेज
कई किताबें अधखुली
कुशलता से रखी सहेज
आगंतुक की प्रथम दृष्टि में
बस आवरण अवलोकित है
झिलमिल-झिलमिल
बुद्धिमता की धाक जमती है
तिल-तिल तिल-तिल
आज उसे है
एक जुलूस में जाना
अन्याय के खिलाफ
एक आवाज है उठाना
अलमीरा से निकाला उसने
तह कर रखा
खादी का कुर्ता
खादी का पायजामा
खादी की एक बंडी
और
कलफ लगी एक गाँधी टोपी
नेता की पोशाक में
वह खूब फबता है
जिस्म से आता
इत्र का भभका है
एक गली से निकला
संग वह अपने सहचर
करने एक द्वन्द
और दूसरी गली में
सारे के सारे
हुए दृष्टिपटल से मंद
कल के अखबार में फोटो दस
प्रबुद्ध खुश
जनता खुश
सरकार खुश
अन्याय खुश
इसलिए
वह प्रबुद्ध है
आँखों पर
सुनहरी फ्रेम का चश्मा
चेहरे पर
रहस्यमयी दिव्य मुस्कान
मूछें कटी
करीने से
चाल में
त्रिलोकी अभिमान
पढता सुबह सवेरे
अंग्रेजी का अखबार
दि हिन्दू, दि एक्सप्रेस
पन्ने पलटते
गहन चिंतन में मग्न
हो रहा जैसे
बुद्धि और तर्क का लग्न
आज रात के भोज में
सूट कौन सा पहनना है ?
फ्रेंच शराब के कितने प्याले
मुर्गे के साथ उड़ेलना है?
सामने कांच की
चकमक मेज
कई किताबें अधखुली
कुशलता से रखी सहेज
आगंतुक की प्रथम दृष्टि में
बस आवरण अवलोकित है
झिलमिल-झिलमिल
बुद्धिमता की धाक जमती है
तिल-तिल तिल-तिल
आज उसे है
एक जुलूस में जाना
अन्याय के खिलाफ
एक आवाज है उठाना
अलमीरा से निकाला उसने
तह कर रखा
खादी का कुर्ता
खादी का पायजामा
खादी की एक बंडी
और
कलफ लगी एक गाँधी टोपी
नेता की पोशाक में
वह खूब फबता है
जिस्म से आता
इत्र का भभका है
एक गली से निकला
संग वह अपने सहचर
करने एक द्वन्द
और दूसरी गली में
सारे के सारे
हुए दृष्टिपटल से मंद
कल के अखबार में फोटो दस
प्रबुद्ध खुश
जनता खुश
सरकार खुश
अन्याय खुश
इसलिए
वह प्रबुद्ध है
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