इस तंग मकां में तेरा रहना हाय हाय
इससे बड़ा तो मेरा दिल हाय हाय
इससे बड़ा तो मेरा दिल हाय हाय
आशिकों की बस्ती में खुदा का भी एक मकां है मगर
दरवाजे पर चुनवाई किसने यह दीवार हाय हाय
दरवाजे पर चुनवाई किसने यह दीवार हाय हाय
पुराने दरख़्त हैं छाया तो देंगे मगर
किसे पता कब टूट कर बिखर जाये हाय हाय
किसे पता कब टूट कर बिखर जाये हाय हाय
मेरे चाहने वालों ने आवाजें कितनी लगायी मगर
हम जहाँ रहते हैं वहाँ उठी ख़ामोशी की बयार हाय हाय
हम जहाँ रहते हैं वहाँ उठी ख़ामोशी की बयार हाय हाय
आज खुश हुआ हूँ तो लिखता हूँ गजल मगर
कलम से मेरी क्यूँ टपके है लहू हाय हाय
कलम से मेरी क्यूँ टपके है लहू हाय हाय