१
खुदा से अभी वास्ता न हुआ
मैं काफ़िर, खुदाई का हिस्सा न हुआ।
रंजिश ने तेरी कर दिया ये हाल
मैं बुरा ना हुआ तू अच्छा ना हुआ।
जुदा होके तुमसे मिजाज कुछ अच्छा न हुआ
रोये तुम भी, आंसू मगर सच्चा ना हुआ।
२
रुदाली की राह तकते हैं
अश्क थोडा कम रखते हैं।
पैसों की अहमियत खूब समझ आती है मगर
रिश्तों में अक्ल थोड़ी कम रखते हैं।
3.
ना चारागर की आवाज, न साकी का साज
जमीं में भी न गदा, थे नौहागर एक राज।
खुदा से अभी वास्ता न हुआ
मैं काफ़िर, खुदाई का हिस्सा न हुआ।
रंजिश ने तेरी कर दिया ये हाल
मैं बुरा ना हुआ तू अच्छा ना हुआ।
जुदा होके तुमसे मिजाज कुछ अच्छा न हुआ
रोये तुम भी, आंसू मगर सच्चा ना हुआ।
२
रुदाली की राह तकते हैं
अश्क थोडा कम रखते हैं।
पैसों की अहमियत खूब समझ आती है मगर
रिश्तों में अक्ल थोड़ी कम रखते हैं।
3.
ना चारागर की आवाज, न साकी का साज
जमीं में भी न गदा, थे नौहागर एक राज।
3 comments:
अच्छी पंक्तिया है ....
एक बार जरुर पढ़े :-
(आपके पापा इंतजार कर रहे होंगे ...)
http://thodamuskurakardekho.blogspot.com/2010/09/blog-post_08.html
Well try . Keep it up .
Brilliant ..
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