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Thursday, September 9, 2010

कुछ अधूरी पंक्तियाँ


खुदा से अभी वास्ता न हुआ
मैं काफ़िर, खुदाई का हिस्सा न हुआ।

रंजिश ने तेरी कर दिया ये हाल
मैं बुरा ना हुआ तू अच्छा ना हुआ।

जुदा होके तुमसे मिजाज कुछ अच्छा न हुआ
रोये तुम भी, आंसू मगर सच्चा ना हुआ।


रुदाली की राह तकते हैं
अश्क थोडा कम रखते हैं।

पैसों की अहमियत खूब समझ आती है मगर
रिश्तों में अक्ल थोड़ी कम रखते हैं।

3. 
ना चारागर की आवाज, न साकी का साज 
जमीं में भी न गदा, थे नौहागर एक राज।

3 comments:

गजेन्द्र सिंह said...

अच्छी पंक्तिया है ....

एक बार जरुर पढ़े :-
(आपके पापा इंतजार कर रहे होंगे ...)
http://thodamuskurakardekho.blogspot.com/2010/09/blog-post_08.html

विवेक सिंह said...

Well try . Keep it up .

Siddharth. said...

Brilliant ..