Labels

Wednesday, July 21, 2010

तेरी तस्वीर से सिजदा करता हूँ....

पास कभी न आओगे ये सोचता हूँ,
मैं अपनी बदकिस्मती पर रोता हूँ।

एक उम्र बितायी है तुम्हे चाहने में,
खाक हो जाते हैं रकीब ये सुनता हूँ।

दायरों में समेत कर तुम्हे कोई कैसे रखे,
बिजली के चमकने की बस आवाज सुनता हूँ।

हो जाओगे किसी और के उम्र भर के लिए,
तेरे पीछे मैं एक उम्र खोता हूँ।

चाँद है आसमान पर और जल रहा हूँ मैं,
सूरज न निकले कुछ कोशिश करता हूँ।

तलब है तेरी ख्वाब हो या हकीकत,
खुल जाये न ये भेद तेरी तस्वीर से सिजदा करता हूँ।

4 comments:

Udan Tashtari said...

बढ़िया!

अजय कुमार said...

खूबसूरत रचना ।

कृपया वर्ड-वेरिफिकेशन हटा लीजिये
वर्ड वेरीफिकेशन हटाने के लिए:
डैशबोर्ड>सेटिंग्स>कमेन्टस>Show word verification for comments?>
इसमें ’नो’ का विकल्प चुन लें..बस हो गया..कितना सरल है न हटाना
और उतना ही मुश्किल-इसे भरना!! यकीन मानिये!!.

वाणी गीत said...

तेरे पीछे मैं एक उम्र खोता हूँ...
अच्छी लगी यह पंक्ति
चाँद है आसमान पर और जल रहा हूँ मैं,
सूरज न निकले कुछ कोशिश करता हूँ...
प्रेम में प्रकृति से भी लड़ जाने की जिद ...
सुन्दर ...!

swati jha said...

i like dis kindaa potry...it shows how passionate u can b....i just luv ur poetry