शब्दों की शक्लें हर दिन बदल रही हैं
अंधेरों को रौशन कहने की की कोशिश चल रही है.
नैतिकता अनैतिकता आज एकताबद्ध हैं
एक दुसरे की गोद में परवरिश चल रही है.
उन्हें सिर्फ़ अपनी चिंता है दिन हो या रात
हम पे आंसूं बहने की साजिश चल रही है.
बड़े बुजूर्ग बतलाते हैं एक गाँव था कभी यहाँ
वीराने में आवाज लगाने की वर्जिश चल रही है।
उनकी नज़रों में हमारा वजूद नहीं है नक्शे पे
उजालों में अंधेरों की कोशिश चल रही है.
चौराहे पर खड़े हैं पर हमें बतलाते रास्ता
आजकल उनके चिंतन की मालिश चल रही है.
झूठ बोल कर बेगुनाह साबित हो सकते हैं
कलयुगी धर्मराजों की महफ़िल सज रही है.
जो उनसे सच कहो, बुरा मान जाते हैं
साफ़- साफ़ कहने पे बंदिश चल रही है.
हर कोई अकेला ही सफर पे निकल पड़ा है
ठूंठ पेडों की पैदाइश निकल रही है.
अंधेरों को रौशन कहने की की कोशिश चल रही है.
नैतिकता अनैतिकता आज एकताबद्ध हैं
एक दुसरे की गोद में परवरिश चल रही है.
उन्हें सिर्फ़ अपनी चिंता है दिन हो या रात
हम पे आंसूं बहने की साजिश चल रही है.
बड़े बुजूर्ग बतलाते हैं एक गाँव था कभी यहाँ
वीराने में आवाज लगाने की वर्जिश चल रही है।
उनकी नज़रों में हमारा वजूद नहीं है नक्शे पे
उजालों में अंधेरों की कोशिश चल रही है.
चौराहे पर खड़े हैं पर हमें बतलाते रास्ता
आजकल उनके चिंतन की मालिश चल रही है.
झूठ बोल कर बेगुनाह साबित हो सकते हैं
कलयुगी धर्मराजों की महफ़िल सज रही है.
जो उनसे सच कहो, बुरा मान जाते हैं
साफ़- साफ़ कहने पे बंदिश चल रही है.
हर कोई अकेला ही सफर पे निकल पड़ा है
ठूंठ पेडों की पैदाइश निकल रही है.
1 comment:
बधाई, अच्छा लिखा है
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